गलता जी

गलता जी

पिंकसिटी जयपुर हमेशा से ही  हवेलियों, प्राचीन महलों और पुरानी बसावट से पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है | इन सब से भिन्न जयपुर अपने भीतर  कई ऐसे प्राचीन मंदिरो को भी समेटे हुए जिन्हें निहारे बगैर जयपुर की यात्रा अधूरी ही मानी जाती है |  उन्हीं मंदिरो में से एक है गलता जी का मंदिर | जयपुर शहर से तक़रीबन दस किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर शहर का रत्न माना जाता है | गलता जी का यह मंदिर न केवल अपने धार्मिक महत्त्व वरन अपनी अनूठी स्थापत्य कला के लिए भी विश्वप्रसिद्ध है | अरावली की सुंदर पहाड़ियों से घिरा यह मंदिर जयपुरराइट्स सहित देशी विदेशी पर्यटकों में ख़ासा लोकप्रिय डेस्टिनेशन माना जाता है । यहाँ बहुत घने जंगल होने से तापमान बहुत कम रहता है और इसी ठंडक में शहर की वादियों को निहराते हुए कब सुबह से शाम हो जाए पता ही नहीं चलता है |  गलता जी में बड़ी संख्या में बंदर हैं इसलिए यह मंदिर ‘बंदरों के मंदिर’ के नाम से भी विख्यात है।

गलता जी का इतिहास

गलता जी का यह मंदिर लगभग 250 वर्ष पुराना है | मंदिर का निर्माण जयपुर के भूतपूर्व शासक व सवाई जय सिंह द्वितीय के दरबार में प्रमुख दरबारियों में से एक दीवान कृपाराम ने करवाया था | गुलाबी रंग के बलुआ पत्थरों से बना यह मंदिर सूर्य देव को समर्पित है।मंदिर की नक्काशी और कला अद्भुत  कारीगरी का दृष्टांत है। मंदिर के पूर्वी हिस्से की वास्तुकला बेहद ही आकर्षक है । गलता जी मंदिर में प्राकृतिक जलधारा भी मौजूद है जो गौमुख से सूरज कुण्ड में गिरती है। गुलाबी बलुआ पत्थर से बना यह मंदिर राजस्थानी हवेली व महल की स्वरुप में ही बनाया गया है | मंदिर में मौजूद  गुंबद गोलाई में हैं और इसकी अंदरूनी दीवारें रंग-बिरंगी होने के साथ ही मंदिर के खंभे नक्काशीदार हैं| मंदिर परिसर में जो नक्काशी की हुई है उसमे भगवान कृष्ण की बचपन की अठखेलियों का चित्रण बेहद ही अनूठे अंदाज़ में किया गया है |

बंदरों की उछलकूद से गुलज़ार मंदिर

गलता जी का नाम सुनते ही मन में बंदरो की तस्वीरें उमड़ने – घुमड़ने लगती है | मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में बंदर रहते है | मकर संक्रांति के पर्व पर  अलग-अलग स्थानों से अनुयायी गलताजी मंदिर पहुंचकर कुंड में स्नान है  । ऐसी मान्यता है की गलता जी के मंदिर के  पवित्र कुंड में स्नान करने से सारे  बुरे कर्मो से मुक्ति मिल जाती है । मंदिर का कुंड हमेशा बन्दरो से गिरा रहता है | बंदरो जो संख्या अधिक होने से  यह मंदिर ‘बंदरों के मंदिर’ के नाम से भी विख्यात है। यहां प्रकृति के खूबसूरत नजारों को भी देखा जा सकता है। बंदरो से आबाद इस मंदिर में आने वाले पर्यटक बंदरो के साथ फोटो खिचवाने और सेल्फी लेने से भी नहीं चूकते है |

सामाजिक परम्पराओं का गवाह है मंदिर

गलता जी के मंदिर में प्राचीनकाल से चली आ रही सामाजिक परम्पराओ की भी झलक मिलती है | मंदिर का निर्माण प्राचीन मापदंड के अनुरूप ही हुआ है मंदिर में पुरुषों और महिलाओं के स्नान के लिए अलग – अलग स्थान बने हुए  है |  कहा जाता है की राजा – महाराजाओं के वक्त महिलाओं और पुरषों में पर्दा प्रथा चलन में थी और इसलिए स्नान के लिए अलग-अलग घाटों का निर्माण हुआ था । गलता जी के मंदिर में  मकर संक्रांति, कार्तिक मास और सावन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैऔर पवित्र जल में स्नान करते हैं।

कैसे पहुंचे गलता जी

पर्यटक गलता जी के मंदिर आसानी से पहुंच सकते है | जयपुर के लिए देश के विभिन्न कोनों से डायरेक्ट फ्लाइट्स उपलब्ध है जिनसे आसानी से जयपुर पंहुचा जा सकता है | जयपुर  हवाई अड्डे से गलता जी मंदिर की दूरी 25 किलोमीटर है। टैक्सी और ऑटो से 60 से 65 मिनट में गलता जी मंदिर पंहुचा जा सकता है | ऑटो 150 से 200 रूपए के शुल्क पर गलता जी मंदिर पंहुचा देते है | इसके अलावा जयपुर तक देश के विभिन्न इलाको से रेल के जरिये किफायती दर पर पहुंचाया जा सकता है |