हवामहल

हवामहल

राजस्थान का नाम सुनते ही दिलोंदिमाग में  रेतली धोरों और मरुस्थल के चित्र उमड़ने – घुमड़ने लगते है | दुनिया की 90 फीसदी से ज्यादा आबादी राजस्थान को मरुस्थल के रूप में ही देखती है और यहाँ तक सोचती है की वहां पानी के लिए दूर- दूर तक भटकना पड़ता है | राजस्थान इन सब धारणाओं से इतर अपने भीतर पर्यटन का खज़ाना छुपाये हुए है | राजस्थान की राजधानी और गुलाबी नगरी या पिंक सिटी के नाम से मशहूर जयपुर भी पर्यटकों के लिए किसी ड्रीम डेस्टिनेशन से कम नहीं है | जयपुर में कई पर्यटन स्थल है जो हमेशा से ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते रहे है | इन्हीं में से एक है जयपुर का हवामहल | हवामहल सिर्फ हवामहल ना होकर जयपुर के लिए ट्रेडमार्क हो गया है | पोस्टकार्ड से लगाकर इंटरनेट पर भी जयपुर की पहचान हवामहल से की जाती है |

हवामहल का इतिहास

हवामहल का निर्माण महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने1799 में करवाया था। हवामहल के आर्किटेक्ट लाल चंद उस्ताद ने हिन्दू भगवान कृष्णा के मुकुट के रूप में इसे डिज़ाइन किया था। ख़ास बात यह है की हवामहल की इस पाँच मंजिला ईमारत के बाहर की ओर समान आकर के शहद के छत्ते भी लगे हुए है और इस महल में 953 छोटी खिड़कियां भी है जिन्हें झरोखा कहा जाता है और इन झरोखो को बारीक़ कलाकृतियों से सजाया भी गया है। हवामहल की वास्तु कला का निर्माण उस दौर में शाही महिलायो को जनता की चकाचौंध से दूर रखने के लिए किया गया था ताकि वो महल से सड़क का सारा दृष्टिकोण देख सके। महल की खिड़कियां डिजाइनर जाली जैसी है जिनसे आसानी से सड़क के दृश्य ही नही पक्षियों की आँखों को भी बारीकी से देखा जा सकता है |

हवामहल के नाम में छुपा है इसका ” राज़ ”

हवामहल के नाम से ही मालुम पड़ता है कि हवा के कारण ही इस महल का नाम हवामहल पड़ा होगा | हवामहल को इस तरह से बनाया गया की इसकी खिड़कियों से महल में हवा एक साथ प्रवेश करती है और महल को हमेशा ठंडा बनाये रखती है |  इस पांच मंजिला इमारत को बहुत ही अनोखे ढंग से बनाया गया है।यह ऊपर से तो केवल डेढ़ फुट चौड़ी है और बाहर से देखने में किसी मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखती है। इस हवामहल में 953 छोटी खिड़कियां हैं जिससे ठंडी और ताजी हवा आती रहती है। जिसके कारण यह जगह बिल्कुल ठंडी रहती है।गुलाबी और लाल रंग के पत्थरों से बना हवा महल आज भी 87 डिग्री के एंगल पर ज्यों का त्यों  खड़ा है. हवामहल  को ‘पैलेस ऑफ़ विंड्स’ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसकी जालीनुमा खिडकियों से हमेशा ठंडी हवाएं आती रहती  है. जयपुर के लोग सहित पर्यटक गर्मियों के दिनों में इस शाही महल में ठहरना पसंद करते हैं.

207 साल बाद हुई महल की  मरम्मत

हवामहल की मरम्मत इसके बनने के 207 साल बाद पहली बार 2006 में हुई.  इस महल की कीमत फिलहाल 4568 मिलियन रूपयों के आसपास है. पहले जयपुर के कॉरपोरेट सेक्टर्स ने इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ली लेकिन बाद में भारत के ही  यूनिट ट्रस्ट ने इसकी जिम्मेदारी संभाल ली. यह  जानकर आपको हैरानी होगी जब हवा महल टूरिस्ट में पॉपुलर हुआ तो  इसके बाद ही इसके कॉम्पलेक्स को विकसित किया गया |

ऐसे पहुंच सकते है हवामहल

हवामहल चूकि जयपुर में है इसलिए यहाँ पहुंचने के लिए सुलभ ट्रांसपोर्ट व्यवस्था उपलब्ध है | पर्यटक यहाँ आसानी से हवाईयात्रा , रेलयात्रा या निजी गाडी से पहुंच सकते है | देश के सभी बड़े सहाहरो से जयपुर के लिए डायरेक्ट फ्लाइट्स उपलब्ध है | यहाँ तक की जयपुर की ट्रैन कनेक्टिविटी भी अन्य जगहों के मुकाबले बेहतर है | पर्यटक जयपुर एयरपोर्ट पहुंच यह से आसानी से हवामहल पहुंच सकते है | हवामहल के नज़दीक जेएलएन मार्ग से हवाई अड्डे की दुरी 11.9 किमी  है।कार या ओटो से हवामहल पहुँचने के लिये  30 से 35 मिनट का समय लगता है | एक तरफ का ओटो का किराया लगभग 110 – 160 होता है वहीँ टैक्सी चालाक 200 रूपए तक लेते है | इधर सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट सेवा के माध्यम से भी हवामहल किफायती दर पर पहुंचा जा सकता है | जयपुर में कई जगहों से बस सेवा हवा महल के लिए उपलब्ध है। पर्यटक ओटो से जवाहर सर्किल पहुंचकर वहां से हवा महल पहुंच सकते है |

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